Saturday, October 27, 2007

मेरा ब्लाग चिठ्ठाजगत से क्यों हटाया गया?

श्री संजय तिवारी ने एक प्रश्न उठाया था.
ब्लागवाणी सारे ब्लाग नहीं दिखाता बल्कि ब्लागों में से खुद चुनकर ब्लाग दिखाता है.

आज संजय बैंगाणी ने भी एक प्रश्न उठाया है.
लेकिन मेरा ये ब्लाग चिठ्ठाजगत में जुड़ा हुआ था. मेरे पास चिठ्ठाजगत से ई-मेल भी है कि मेरा ये ब्लाग चिठ्ठाजगत में शामिल कर लिया गया है. मेरी कुछ पोस्टें चिठ्ठाजगत पर दिखीं भी पर अचानक मेरा ये ब्लाग चिठ्ठाजगत से हटा दिया गया?

क्यों?
क्योंकि मैं सिरिल गुप्त का छोटा भाई हूं?
सिर्फ यही नहीं बल्कि इस परिवार के सभी ब्लाग हटा दिये गये?
चिठ्ठाजगत सिरिल के ब्लाग क्यों नहीं दिखाता?

नूर मोहम्मद खान का चिठ्ठा क्यों हटाया गया?

तुम करो तो लीला
कोई और करे तो छेड़खानी!

तुम्हारा खून खून
बाकी सब का खून पानी?

ये कौन सा पैमाना है भाई?

पुनश्च: अभी हम फीड बन्द कर रहे हैं ताकि सत्य बदला न जा सके

12 comments:

आशीष said...

मुद्दा गंभीर है

Aflatoon said...

संकीर्णता को बेनकाब करने के लिये धन्यवाद ।

संजय बेंगाणी said...

मैने आपको निजी मेल किया है, साथ ही जोगलिखी पर टिप्पणी भी की है.

आपने सही सवाल उठाया है, मगर आलोकजी का चिट्ठा हटाने का गलत काम करने के बाद. आपने पहले क्यों नहीं पूछा. अब आपके प्रश्न का जवाब विपुलजी देगें.

मित्र में दो एग्रिगेटो के बिच का पंच नहीं हूँ. आलोकभाई का चिट्ठा ब्लोगवाणी से हटाना एक दुखद घटना है और इसने मुझे व्यथित किया है. मैने केवल अपनी व्यथा लिखी है और विरोध दर्ज किया है.

अभिनव said...

मैं किसी को भी सार्वजनिक मंच पर लाकर सवाल जबाब करके बेइज्जत क्यों करूं. उन्होंने हमें हटा दिया ये उनका मामला है.
आप आलोकभाई के चिठ्ठे के ब्लागवाणी में न होने से व्यथित हैं, क्योंकि वो महान चिठ्ठाकार हैं. मैं एक नया और अदना सा ब्लागर हू तो मेरे ब्लाग के हटाने पर आप व्यथित नहीं हैं!

Aflatoon said...

नये और अदना ब्लॉगर अभिनव , तुम व्यथित मत होना ।

अरुण said...

अभी भी नारद के सयोजक ब्लोगवाणी का विरोध करने के लिये चिट्ठाजगत के साथ काम मे लगे है ....ये उसी काम से जुडी कडिया है जिसके चलते उन्होने ब्लोगवाणी से जुडे लोगो को चिट्ठाजगत से हटाया है अब और बेचारे कर भी क्या सकते है..खिसियानी बिल्ली खंभा ही नोचती है ना..? एक वो सबसे पुराने का ढोल बजाते रहते थे.लोजी अब एक और आ गया..इन्हे चाहिये कि घोषणा कर दे कि हिंदी इंटर्नेट पर प्रथम पुरुष और नारद की बपोती है और कोई ना प्रयोग करे ..ताकी ये हिंदी की सेवा कर सके..:)

अनूप शुक्ल said...

पता नहीं कैसे ऐसे हुआ लेकिन यह दुखद है कि ब्लाग एग्रिगेटर् बिना किसी गलती के चिट्ठे हटा दें। चाहे वह् अभिनव् का चिट्ठा हो या आलोक् का। सच् आप् लोगों को पता होगा लेकिन अब आगे कहा-सुनी न् करके दोनों संकलक इसे जोड़ लें तो अच्छा होगा।

Anonymous said...

क्या आपने कल ज्ञानदत्त जी की पोस्ट पढ़ी? यदि नहीं तो पढिये।
ये एग्रीगेटरों की लढ़ाई है। व्यावसायिक प्रतिद्वन्दिता में एसा होता ही रहता है, भले ही आप इसे व्यवसाय न माने।
इसकी मुहिम पिछले कई दिनों से चल रही थी। ढेरों ईमेल भेजी जा रहीं थीं। मुझे भी मिली।
इसे सीरियसली न लें, अपना काम करना जारी रखें। आप ब्लागवाणी पर काम करें। इसे और बेहतर बनायें। आलोक भाई के लिये यही सही होगा कि वे चिठ्ठाजगत पर काम करें।
चिठ्ठाजगत भी अच्छा एग्रीगेटर है, और ब्लागवाणी भी। आप ब्लागवाणी पर खुश रहें, वो चिठ्ठाजगत पर खुश रहेंगे। न आपको चिठ्ठाजगत में अपना ब्लाग जुड़वाने की जरूरत है न आलोक भाई को ब्लागवाणी में अपना चिठ्ठा शामिल कराने की। सभी जानते हैं कि यह एक प्रतिद्वन्दी का दूसरे प्रतिद्वन्दी पर हमला है।

mahashakti said...

अच्‍छी बहस है, मुझे भी देखना पड़ेगा, कि मै कहॉं कहॉं हूँ। :)

अभिनव जी मै आपके साथ है।

Shrish said...

मेरे विचार से यह किसी तकनीकी भूल से उपजी गलतफहमी से हुआ। अनूप जी से सहमत हूँ कि दोनों एग्रीगेटरों पर सभी हटे ब्लॉग जोड़ लिए जाएँ।

अभिनव said...

श्री अफलातून जी आपका बहुत बहुत आभार. आपके जितनी सात्वना तो मुझे मेरे अपनों से भी नहीं मिली. श्री अरुण जी, श्री महाशक्ति जी, अनेकाधिक धन्यवाद.

श्री अज्ञात जी, आपने विवाद को सही समझा और समझाया.

श्री संजय बेंगाणी, श्री अनूप शुक्ल, श्री श्रीष, एवं श्री आशीष जी आपका इस ब्लाग पर आने के लिये आभार.

इस ब्लाग के किसी एग्रीगेटर से हटाये जाने की परिणिति अब आप केवल नाटकों पर केन्द्रित वेबसाईट के रूप में देखेंगे.

Aflatoon said...

अभिनव , एक फाल्तू विवाद का सार्थक पटाक्षेप यही हो सकता था कि अब इस चिट्ठे पर रंगमंच सम्बन्धी पोस्ट ही दिखेंगी। आपकी सूझबूझ के कायल हो गए ।